बड़ा घोटाला: चपरासी ने 15 महीनों में 29 लाख रुपये का गबन, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप...

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। कोटा ब्लॉक शिक्षा कार्यालय में पदस्थ एक चपरासी ने महज 15 महीनों के भीतर 29 लाख 62 हजार 322 रुपये का गबन कर लिया। आरोपी ने वेतन के नाम पर अपने बैंक खाते में यह अतिरिक्त रकम ट्रांसफर कर ली। मामले के उजागर होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है।

चपरासी को मिला था डीडीओ का अधिकार

जानकारी के मुताबिक तत्कालीन और वर्तमान बीईओ ने कार्यालय में पदस्थ चपरासी को ही डीडीओ (आहरण एवं संवितरण अधिकारी) का अधिकार दे दिया था। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने वेतन बिलों में हेराफेरी कर बड़ी रकम अपने खाते में जमा कर ली।

बताया जा रहा है कि आरोपी पिछले 10 से 15 वर्षों से वेतन बिल बनाने का काम संभाल रहा था, जिससे उसे पूरी प्रक्रिया की जानकारी थी।

जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

मामले की शिकायत मिलने के बाद संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन ने बिलासपुर के वरिष्ठ कोषालय अधिकारी को जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान वेतन भुगतान के डेटा की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

जांच में पता चला कि आरोपी ने अलग-अलग महीनों में अपने वेतन में असामान्य वृद्धि दिखाकर लाखों रुपये निकाल लिए।

ऐसे किया लाखों रुपये का गबन

जांच रिपोर्ट के अनुसार:

  • सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच लगभग 25.04 लाख रुपये अतिरिक्त निकाले गए।

  • इसके बाद मार्च 2025 से नवंबर 2025 के बीच करीब 4.57 लाख रुपये और निकाले गए।

कई महीनों में आरोपी ने अपने खाते में 4.95 लाख रुपये तक की राशि ट्रांसफर कर ली थी।

अधिकारियों की आईडी और डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल

बताया गया कि आरोपी देवेन्द्र कुमार पालके, जो मूल रूप से भृत्य (चपरासी) है, वेतन बनाने के लिए मेकर आईडी का उपयोग करता था। इतना ही नहीं, उसने अधिकारियों की चेकर आईडी और डिजिटल सिग्नेचर का भी इस्तेमाल कर बिल पास किए और कोषालय भेज दिए।

नियमों के अनुसार वेतन बिलों का सत्यापन आहरण एवं संवितरण अधिकारी को करना होता है, लेकिन यहां चपरासी ही बिल तैयार कर उसे खुद ही पास कर रहा था।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने वित्तीय अनियमितता, दस्तावेजों से छेड़छाड़ और अन्य धाराओं के तहत एक से अधिक आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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