वैसे तो दुनिया में कई खतरनाक प्रजाति के सांप हैं. लेकिन कुछ सांप इतने आक्रामक होते हैं कि सावधान रहने के बाद भी आप उसके हमले से बच नहीं सकते. इसी में से एक है वाईपर स्नेक. बिजली की रफ़्तार से हमला करने वाले ये सांप इंसानों को भी अपना शिकार बनाने से नहीं हिचकते.
दुनिया में कई जहरीले और खतरनाक सांप हैं, लेकिन कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जो अपनी आक्रामकता और बिजली जैसी रफ्तार से सबको हैरान कर देती हैं. इनमें सबसे आगे है वाइपर स्नेक (Viper Snake). ये सांप इतनी तेजी से हमला करता है कि इंसान की आंख झपकने से पहले ही डंस कर जहर भर देता है और वापस अपनी जगह पर लौट जाता है.
हाल की हाई-स्पीड कैमरा रिसर्च ने इस रहस्य को खोल दिया है कि वाइपर का अटैक कितना घातक और तेज होता है. 2025 में जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में 36 अलग-अलग जहरीले सांपों की प्रजातियों पर रिसर्च की गई. इसमें वाइपर फैमिली के सांपों ने सबसे तेज स्ट्राइक दिखाई. हाई-स्पीड कैमरों (1000 फ्रेम्स प्रति सेकंड) से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में साफ दिखा कि कई वाइपर स्पीशीज का पूरा हमला सिर्फ 40 से 90 मिलीसेकंड में पूरा हो जाता है. कुछ मामलों में तो ये 40 मिलीसेकंड से भी कम समय में लक्ष्य पर पहुंच जाता है.
पलक झपकने से पहले अटैक
इंसान की विजुअल रिएक्शन टाइम औसतन 200-250 मिलीसेकंड होती है. यानी खतरा दिखते ही दिमाग को समझने और बॉडी को रिएक्ट करने में इतना समय लगता है. स्पाइनल रिफ्लेक्स (रीढ़ की हड्डी से सीधा रिएक्शन) भी 50-70 मिलीसेकंड लेता है. लेकिन वाइपर का स्ट्राइक इतना तेज है कि इंसान या शिकार को नोटिस करने से पहले ही फैंग्स अंदर-बाहर हो चुके होते हैं. फोर्ब्स में हर्पेटोलॉजिस्ट स्कॉट ट्रैवर्स ने लिखा है कि “जब आप खतरा देखते हैं, तब तक स्ट्राइक खत्म हो चुका होता है.”
ये सांप एम्बुश प्रीडेटर होते हैं, यानी छिपकर हमला करते हैं. वे शिकार (छोटे स्तनधारी, पक्षी, चूहे) का इंतजार करते हैं और जैसे ही मौका मिलता है, बलिस्टिक जैसी स्पीड से लॉन्च हो जाते हैं. स्टडी में सबसे तेज पाया गया टर्सियोपेलो (Bothrops asper) या फेर-डे-लांस, जिसकी एवरेज पीक वेलोसिटी 3.5 मीटर प्रति सेकंड थी. अन्य तेज वाइपर में हॉर्न्ड पिट वाइपर, ब्लंट-नोज्ड वाइपर और राइनो वाइपर शामिल हैं, जो 3.3 मीटर/सेकंड से ज्यादा स्पीड पकड़ते हैं.
वीडियो में भी दिखना मुश्किल
हाई-स्पीड वीडियो में देखा गया कि वाइपर पहले फैंग्स को फोल्ड करके आगे बढ़ाते हैं, टारगेट पर डालते हैं, फिर “वॉक” करके बेहतर पोजिशन में लाते हैं और जहर इंजेक्ट करते हैं. कुछ स्पीशीज में फैंग्स को बार-बार एडजस्ट करते देखा गया ताकि जहर ज्यादा गहराई तक पहुंचे. ये सब 100 मिलीसेकंड के अंदर होता है, जो इंसान की ब्लिंक (आंख झपकने) से भी तेज है (ब्लिंक औसतन 100-400 मिलीसेकंड) का होता है.
भारत में रसेल्स वाइपर (Russell’s Viper) भी इसी फैमिली का है, जो बिग फोर में शामिल है. ये सांप ग्रामीण इलाकों में चूहों के पीछे रहता है और इंसानों पर अक्सर हमला करता है. इसका जहर इतना घातक है कि काटने पर किडनी फेलियर, ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर और मौत हो सकती है.
जहर है जानलेवा
स्टडी बताती है कि ऐसे सांपों का हमला इतना तेज होता है कि बचाव मुश्किल होता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि लाखों सालों की इवोल्यूशन ने वाइपर को ये स्पेशलाइजेशन दिया है. बड़े साइज के सांप ज्यादा मसल पावर से तेज स्ट्राइक करते हैं. ये सिर्फ शिकार पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि डिफेंसिव भी होता है. अगर कोई खतरा महसूस होता है, तो तुरंत अटैक करता है. इस रिसर्च से साफ है कि वाइपर न सिर्फ जहरीले हैं, बल्कि उनकी स्पीड प्रकृति का कमाल है. हाई-स्पीड कैमरा ने जो दिखाया, वो नंगी आंख से कभी नहीं देखा जा सकता.