विशाखापट्टनम / भारत ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना ने अपनी चौथी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) ‘S4’ को लॉन्च किया है, जिससे देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और बढ़ गई है। इस पनडुब्बी का 75% हिस्सा भारत में ही निर्मित है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल देता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर (SBC) में इस परमाणु पनडुब्बी का उद्घाटन किया। S4 SSBN पनडुब्बी 300 किलोमीटर तक की न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल से लैस है, जो देश की समुद्री शक्ति में एक महत्वपूर्ण इजाफा है। इसके लॉन्च के साथ ही भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बेड़े में और मजबूती आई है।
भारत की परमाणु पनडुब्बियों की श्रृंखला:
भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी INS चक्र (S1), उसके बाद INS अरिहंत (S2) और INS अरिघाट (S3) हैं, जो पहले से ही ऑपरेशन में हैं। अब S4 पनडुब्बी भी इस श्रृंखला में शामिल हो गई है। INS अरिहंत, 750 किमी रेंज की K-15 मिसाइलों से लैस है, जबकि S4 में 3,500 किमी रेंज वाली K-4 मिसाइलें हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के लिए यह एक गंभीर चुनौती है, क्योंकि भारत की नौसेना अब और भी अधिक प्रभावी और तैयार हो चुकी है। केंद्र सरकार ने विशेष रूप से चीन के खिलाफ इस दिशा में ध्यान केंद्रित किया है और भारतीय नौसेना को और भी परमाणु हमलावर पनडुब्बियों से सुसज्जित करने की योजना बनाई है।
2028 में और होगी शक्ति में वृद्धि:
भारतीय नौसेना में 2028 तक एक और रूसी अकुला क्लास की परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी शामिल होने वाली है, जो भारत की शक्ति में और इजाफा करेगी। इसके अलावा, दिसंबर 2024 में INS वाग्शीर, जो कलवरी श्रेणी की पारंपरिक पनडुब्बी है, भी नौसेना में शामिल हो जाएगी।
भारतीय नौसेना की शक्ति:
- चौथी SSBN पनडुब्बी ‘S4’ लॉन्च।
- 300 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलों से लैस।
- 75% स्वदेशी निर्माण।
- 3,500 किमी रेंज की K-4 मिसाइलें।
भविष्य की योजनाएं:
केंद्र सरकार ने विमानवाहक पोत से ज्यादा परमाणु हमलावर और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों को प्राथमिकता दी है, जिससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।