प्राचीन मिस्र की ममियां हमेशा से रहस्य और रोमांच का विषय रही हैं। अब आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी ने 2,000 साल पुरानी इन लाशों के ऐसे राज खोले हैं, जिन्हें जानकर वैज्ञानिक भी हैरान रह गए।
किन ममियों पर हुआ शोध?
अमेरिका की University of Southern California के केक मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने दो मिस्री पुजारियों — नेस-मिन (लगभग 330 ईसा पूर्व) और नेस-होर (लगभग 190 ईसा पूर्व) — की ममियों का हाई-रेजोल्यूशन CT स्कैन किया। ये स्कैन 320-स्लाइस हॉस्पिटल-ग्रेड मशीन से किए गए, जिससे 50,000 से अधिक इमेज तैयार हुईं और उनका 3D मॉडल बनाया गया।
CT रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?
1. कमर और कूल्हे की गंभीर समस्या
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नेस-मिन की रीढ़ में डिजनरेशन और लोअर बैक में कोलैप्स के संकेत मिले।
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नेस-होर के कूल्हे में गंभीर डिजनरेशन पाया गया।
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ये समस्याएं आज के ऑफिस वर्कर्स या भारी काम करने वालों जैसी ही थीं।
2. दांतों की खराब हालत
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कई कैविटी और दांतों का गिरना सामने आया।
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इससे संकेत मिलता है कि प्राचीन काल में भी डेंटल समस्याएं आम थीं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह साबित करता है कि 2000 साल पहले भी इंसान उम्र बढ़ने के साथ वैसी ही बीमारियों से जूझता था जैसी आज।
नई तकनीक ने बदली तस्वीर
शोध टीम के 3D इमेजिंग डायरेक्टर ने बताया कि पहले एक्स-रे से सीमित जानकारी मिलती थी, लेकिन आधुनिक CT स्कैन ने शरीर के अंदरूनी हिस्सों, हड्डियों और अंगों की बारीक डिटेल सामने ला दी। स्कैन में चेहरे की पलकें, होंठों का आकार और आंखों की बनावट तक स्पष्ट दिखी — जिससे उनकी जीवनशैली का अंदाजा लगाया गया।
कब्र में छिपे मिले रहस्यमयी ताबीज
स्कैन के दौरान लिनेन में छिपे स्कारब बीटल और मछली के आकार के अमूलेट भी मिले। ये ताबीज मृत्यु के बाद सुरक्षा और पुनर्जन्म के प्रतीक माने जाते थे। यह खोज बताती है कि प्राचीन मिस्र की दफन संस्कृति कितनी जटिल और प्रतीकात्मक थी।
क्या बताती है ये खोज?
यह अध्ययन दर्शाता है कि मानव शरीर की संरचना और बीमारियों का पैटर्न हजारों सालों में ज्यादा नहीं बदला। पीठ दर्द, जोड़ों की समस्या और दांतों की तकलीफ — ये समस्याएं तब भी थीं और आज भी हैं।