अरपा और अन्य नदियों के संरक्षण पर हाईकोर्ट में सुनवाई, बिलासपुर नगर निगम ने पेश किए शपथपत्र...

हाईकोर्ट में नदियों के संरक्षण की सुनवाई

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बुधवार को अरपा नदी के संरक्षण और उसके उद्गम स्थल के पुनरुद्धार को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कोर्ट ने कोरबा और गौरेला पेंड्रा मरवाही (जीपीएम) जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे लीलागर, सोन और टिपान नदियों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी शपथपत्र के रूप में प्रस्तुत करें।

प्रमुख नदियों में संरक्षण

सुनवाई में केवल अरपा नदी ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य प्रमुख नदियां—महानदी, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो और शिवनाथ—भी शामिल की गई हैं। जल संसाधन विभाग ने पर्सनल एफिडेविट पेश कर बताया कि प्रत्येक जिले में विशेष समितियां बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य नदियों के उद्गम स्थलों की पहचान और उनके पुनरुद्धार के लिए सुझाव देना है। समितियों को समय-समय पर रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिलासपुर नगर निगम की तैयारी

बिलासपुर नगर निगम आयुक्त ने शपथपत्र में बताया कि अरपा नदी में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिए कई सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए गए हैं।

  • चिल्हाटी और दोमुहानी में क्रमशः 17 एमएलडी और 25.79 एमएलडी क्षमता वाले प्लांट काम कर रहे हैं।

  • अक्टूबर 2025 में पचरी घाट पर 1 एमएलडी क्षमता वाला नया STP चालू हुआ।

  • कोनी में 6 एमएलडी क्षमता वाला STP जल्द ही चालू होगा।
    नगर निगम ने शेष अपशिष्ट जल के उपचार के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की है और फिजिबिलिटी जांच के लिए समिति गठित की है।

हाईकोर्ट के निर्देश

  • जल संसाधन सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि वे विस्तृत पर्सनल शपथपत्र फाइल करें, जिसमें मुख्य नदियों के संरक्षण और पुनरुद्धार से जुड़े प्रस्ताव, अब तक उठाए गए कदम और अपेक्षित समय सीमा स्पष्ट हों।

  • बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को भी निर्देश मिले कि वे सीवरेज प्लांट की वर्तमान स्थिति, अनुपचारित पानी छोड़ने पर रोक और पिछले निर्देशों के पालन की पूरी जानकारी प्रस्तुत करें।

अगली सुनवाई

कोर्ट ने सभी एफिडेविट अगली सुनवाई से पहले फाइल करने का आदेश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2025 को होगी, जिसमें नदियों के संरक्षण और पुनरुद्धार की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नदियों के संरक्षण को गंभीरता से लिया जा रहा है और राज्य प्रशासन एवं नगर निगम से अपेक्षा है कि वे समयबद्ध तरीके से अपने दायित्वों का पालन करें।

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