
पेंड्रा की घटना के बाद प्रशासन सख्त
गरियाबंद। जिले के मैनपुर ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लिनिकों पर दबिश दी। हाल ही में पेंड्रा इलाके में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से युवक की मौत के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य अमले ने छापेमारी कर कई जगहों से दवाएं, इंजेक्शन और उपकरण बरामद किए।
सरकार क्लिनिक और मल्टी स्पेशलिटी क्लिनिक पर छापा
नोडल अधिकारी डॉक्टर हरीश चौहान की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ने सबसे पहले मैनपुर मुख्यालय के पास स्थित सरकार क्लिनिक पर कार्रवाई की। यहां बिना अनुमति के इलाज चल रहा था। इसके बाद अमलीपदर मार्ग के भाठीपारा में मल्टी स्पेशलिटी क्लिनिक पर छापा मारा गया। दोनों जगहों से बड़ी मात्रा में दवाएं और खुले इंजेक्शन बरामद किए गए।

शिक्षक ने स्कूल में छुपाए मेडिकल उपकरण
सर्ना बहाल में छापेमारी के दौरान एक स्कूल शिक्षक द्वारा इलाज करने की जानकारी मिली। टीम को मौके से दवा और उपकरण मिले। आरोपी शिक्षक ने इन्हें निजी उपयोग का बताकर बचने की कोशिश की, लेकिन उसके खिलाफ प्रमाण जब्त किए गए।
कार्रवाई की भनक लगते ही झोलाछाप फरार
अमलीपदर क्षेत्र में करीब 30 से ज्यादा झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय बताए जाते हैं। कई राजनीतिक संरक्षण में क्लिनिक चला रहे हैं। छापेमारी की जानकारी मिलते ही अधिकांश झोलाछाप अपने क्लिनिक बंद कर फरार हो गए। यहां तक कि एक वेटरनरी डॉक्टर भी इंसानों का इलाज करता पकड़ा गया। वहीं, अंजना क्लिनिक बंद मिला।
पेंड्रा की घटना बनी कार्रवाई की वजह
20 अगस्त को पेंड्रा के झोलाछाप डॉक्टरों संजू मंडल और बबलू तांडी ने 30 हजार रुपए लेकर बवासीर के मरीज का इलाज किया। इलाज बिगड़ने पर पीड़ित पुरुषोत्तम ध्रुव की मौत हो गई। इस घटना के बाद जिलेभर में सख्ती बढ़ा दी गई।
नोटिस देकर छोड़े गए क्लिनिक संचालक
स्वास्थ्य विभाग ने जिन क्लिनिकों में अवैध संचालन पाया, वहां सिर्फ नोटिस जारी किया। डॉक्टर हरीश चौहान ने कहा कि संचालकों को नर्सिंग एक्ट के तहत पंजीयन कराना होगा, अन्यथा कार्रवाई जारी रहेगी।
नरमी पर उठे सवाल
लोगों का कहना है कि जब स्पष्ट सबूत और दवाएं जब्त हुईं, तो सिर्फ नोटिस थमाकर कार्रवाई खत्म करना पर्याप्त नहीं है। अवैध क्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की यह नरमी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
