भारत की इस गांव में पैदा लेना चाहेगी हर लड़की, होती है दूल्हे की विदाई, चलता है महिला का राज...

भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में, जहां बेटा जायदाद का हकदार माना जाता है और शादी में दुल्हन की विदाई का रिवाज है, मेघालय का खासी समुदाय एक अनोखा उदाहरण पेश करता है. यहां ‘उल्टी गंगा’ बहती है. वंश मां से चलता है, संपत्ति बेटियों को मिलती है और शादी के बाद दूल्हा ही ससुराल चला जाता है. यह मैट्रिलाइनियल सिस्टम, जो खासी, गारो और जैनतिया ट्राइब्स में प्रचलित है, महिलाओं को केंद्र में रखता है.

2025 में यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम लिंग समानता का वैश्विक मॉडल है, जहां महिलाएं फैसले लेती हैं और पुरुष सहयोगी होते हैं. खासी ट्राइब, जो मेघालय की 48% आबादी है, का इतिहास 5000 साल पुराना माना जाता है. यहां वंशावली मां से तय होती है. बच्चों का सरनेम मां का होता है. वहीं संपत्ति का हस्तांतरण सबसे छोटी बेटी ‘का खडूह’ को होता है जो परिवार की ‘कीस्टोडियन’ बनती है.

अगर कोई बेटी ना हो, तो भतीजी को मिलती हो. पुरुषों को ‘उ हेडार’ कहा जाता है. वे संपत्ति के मालिक नहीं, सिर्फ संरक्षक होते हैं. शादी के बाद दूल्हा पत्नी के घर जाता है, अपनी मां का घर छोड़ कर. यह ‘दूल्हे की विदाई’ रिवाज समाज को मजबूत बनाता है क्योंकि महिलाएं घर की नींव मानी जाती हैं.

चलता है महिलाओं का राज

महिलाओं का राज यहां साफ दिखता है. परिवार के बड़े फैसले—जैसे शादी, संपत्ति बंटवारा आदि महिलाएं लेती हैं. लेकिन पुरुषों की भूमिका नगण्य नहीं है. मामा (कनी) का रोल महत्वपूर्ण होता है. वह भांजों का संरक्षक, शिक्षा-करियर का मार्गदर्शक होता है. एक अध्ययन के मुताबिक, खासी समाज में मामा-पुत्री का बंधन पितृसत्ता के पिता-पुत्र जैसा मजबूत है.

शादी के अनोखे रिवाज

इस ट्राइब में शादी के रीति-रिवाज अनोखे है. यहां क्लैन एक्सोगेमस यानी मां के गोत्र में विवाह वर्जित है. अगर ऐसा किया गया तो सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है. प्रेम विवाह प्रचलित है लेकिन परिवार की सहमति जरूरी है. दहेज नहीं लिया जाता बल्कि दुल्हन पक्ष उपहार देता है. 2025 में एक सर्वे में पाया गया कि खासी महिलाओं में तलाक दर कम है क्योंकि संपत्ति का हक उन्हें मजबूत बनाता है.

मेघालय के तीन मैट्रिलाइनियल समुदाय—खासी (पूर्वी), गारो (पश्चिमी), जैनतिया (जैनतिया हिल्स) हैं जो इस सिस्टम को अपनाते हैं. गारो में ‘महारी’ यानी सबसे छोटी बेटी को संपत्ति मिलती है. जबकि जैनतिया में साझा विरासत होती है. लेकिन खासी सबसे प्रमुख है. यह सिस्टम पूर्वजों से चला आ रहा है जहां प्रकृति पूजा और एनिमिज्म में महिलाओं को देवी माना जाता है. शिलांग जैसे शहरों में भी यह जीवित है. हालांकि शहरीकरण से बदलाव आ रहे हैं.

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