
अगर किसी के घर के आस-पास दो से ज्यादा कुत्ते हों तो रात में भौंक-भौंककर पूरे घर-मुहल्ले को जगा देते हैं. लेकिन सोचिए, उस घर की हालत, जहां 250 से ज्यादा कुत्ते बंद हों? ऐसे ही एक मामले में जब रेस्क्यू टीम उन्हें बचाने पहुंची, तो अंदर का नजारा देख उनके भी होश उड़ गए. दुनियाभर में बेजुबान जानवरों के प्रति क्रूरता और लापरवाही की खबरें तो आती रहती हैं, लेकिन कभी-कभी इंसान की एक छोटी सी गलती बेकाबू होकर ऐसी डरावनी तस्वीर पेश करती है कि यकीन करना मुश्किल हो जाता है.
ऐसी ही एक घटना ब्रिटेन से सामने आई है, जहां एक घर के अंदर से दिन-रात कुत्तों के भौंकने की आवाज आती थी. एक दिन जब रेस्क्यू टीम उस घर में पहुंची तो अंदर का नजारा देख उनके होश उड़ गए. वहां पर छोटे से घर में उन्हें 250 से ज्यादा कुत्ते बंद मिले. बचाव कर्मियों ने पूडल-क्रॉस प्रजाति के इन कुत्तों को बेहद खराब स्थिति में पाया.

यह पूरा झुंड एक ही परिवार का था, जिसने कुत्तों की ब्रीडिंग पर से नियंत्रण खो दिया था. इस तरह उनकी जनसंख्या बढ़ती चली गई और देखते ही देखते घर एक तबेले में तब्दील हो गया. इनमें से 87 कुत्तों को RSPCA ने अपने संरक्षण में ले लिया है, जबकि बाकी को डॉग्स ट्रस्ट को सौंप दिया गया है. RSPCA की सुप्रीटेंडेंट जो हर्स्ट ने बताया कि यह फोटो कोई AI से नहीं बनी है, बल्कि यह एक कड़वी हकीकत है जिसे हमारे अधिकारी आए दिन देख रहे हैं.


जब अच्छे इरादों वाले मालिक भी कुत्तों की बढ़ती संख्या के आगे बेबस हो जाते हैं, तो स्थितियां इसी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं. बता दें कि इन 250 कुत्तों के बीच स्टीवी और सैंडी नाम के दो कुत्तों की कहानी ने हर किसी का दिल जीत लिया है. स्टीवी एक क्रीम रंग की कॉकर स्पैनियल है जो जन्म से अंधी और बहरी है. वह पूरी तरह से अपनी दोस्त सैंडी पर निर्भर है, जो उसकी गाइड बन गई है.
घर में इतनी भीड़ और शोर के बावजूद सैंडी ने कभी स्टीवी का साथ नहीं छोड़ा. फिलहाल ये दोनों हर्टफोर्डशायर के साउथ्रिज एनिमल सेंटर में एक नए और प्यार करने वाले परिवार का इंतजार कर रहे हैं. इन दोनों ने कभी पट्टे पर चलना नहीं सीखा है, इसलिए इन्हें एक सुरक्षित और निजी गार्डन वाले घर की जरूरत है. घर से छुड़ाए गए कुत्तों के साथ रेस्क्यू टीम की एक सदस्य.
मशहूर रेडियो डीजे और रियलिटी टीवी स्टार केट लॉलर ने भी इन कुत्तों से मुलाकात की. उन्होंने कहा, ‘स्टीवी बहुत बहादुर है और जिस तरह सैंडी उसकी मदद करती है, वह वाकई अद्भुत है. यह कहानी उन खतरों की याद दिलाती है जब लोग अपनी क्षमता से ज्यादा जानवर घर में रख लेते हैं और फिर उन्हें संभाल नहीं पाते.’
RSPCA के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल देशभर में 4,000 से अधिक ऐसे मामले सामने आए, जहां एक ही पते पर 10 या उससे ज्यादा जानवर रखे गए थे. जो हर्स्ट का मानना है कि इतने जानवरों को पालने की यह प्रवृत्ति अक्सर गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी होती है. लोग अक्सर जानवरों से प्यार के कारण पहले पालते हैं, फिर उनकी संख्या 50 या 100 पार कर जाती है, तो वे न केवल जानवरों को बल्कि खुद को भी नरक में धकेल देते हैं. हाल ही में ऐसे ही हालात में एक घर से 20 गिनी पिग्स भी रेस्क्यू किए गए थे.
