नेशनल हाईवे पर सफर करते समय टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाने के बाद मिलने वाली छोटी सी पर्ची को ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे कचरे में फेंक देते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट में एक पुलिस अधिकारी के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस रसीद को रखने के तीन बड़े फायदे हैं.
पोस्ट में कहा गया है कि गाड़ी खराब होने पर टोल वालों की जिम्मेदारी होगी, पेट्रोल खत्म हो जाए तो रसीद पर दिए नंबर पर कॉल करके पेट्रोल पहुंचा दिया जाएगा और खराब सड़क या गड्ढों से एक्सीडेंट होने पर हर्जाना भी मिलेगा. लेकिन क्या ये दावे पूरी तरह सच हैं? आइए NHAI की आधिकारिक जानकारी और फैक्ट चेक के आधार पर विस्तार से समझते हैं.
क्या है दावे में बताए गए फायदे
इस वीडियो में तीन मुख्य फायदे बताए गए हैं-
पहला: गाड़ी खराब हो जाने पर उसे सुरक्षित जगह तक ले जाने (towing या क्रेन) की जिम्मेदारी टोल ऑपरेटर की होगी.
दूसरा: अगर पेट्रोल खत्म हो जाए तो रसीद पर मौजूद नंबर डायल करके नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचने लायक तेल फ्री दिया जाएगा.
तीसरा: यात्रा के दौरान गड्ढों या खराब सड़क की वजह से एक्सीडेंट हो तो टोल कंपनी हर्जाना देगी.
NHAI और Indian Highways Management Company Limited (IHMCL) की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, नेशनल हाईवे पर इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन रसीद अनिवार्य नहीं है. पूरे देश में 1033 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे काम करता है. ब्रेकडाउन, एक्सीडेंट, मेडिकल इमरजेंसी या कोई भी समस्या होने पर इस नंबर पर कॉल करके हाईवे पेट्रोल, एम्बुलेंस और क्रेन सेवा मांगी जा सकती है. ये सेवाएं टोल देने वाले या ना देने वाले हर यूजर को उपलब्ध है.
टोइंग (क्रेन) सेवा के बारे में
अगर आपकी गाड़ी हाईवे पर खराब हो जाती है तो हाईवे पेट्रोल वैन या क्रेन मदद करती है. कई मामलों में towing फ्री या न्यूनतम शुल्क पर होती है, लेकिन ये पूरी तरह टोल रसीद पर निर्भर नहीं करता. रसीद रखने का फायदा सिर्फ इतना है कि उस पर लोकल टोल प्लाजा का हेल्पलाइन नंबर छपा होता है, जिससे तुरंत संपर्क करना आसान हो जाता है. लेकिन 1033 डायल करने से भी काम हो जाता है.
पेट्रोल खत्म होने पर फ्री फ्यूल डिलीवरी
फैक्ट चेक संगठनों (जैसे Factly) के अनुसार यह दावा ज्यादातर बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है. NHAI के आधिकारिक दस्तावेजों में टोल प्लाजा द्वारा फ्यूल सप्लाई करने की कोई गारंटीड जिम्मेदारी नहीं लिखी है. कुछ पुरानी वायरल पोस्ट्स में 5-10 लीटर पेट्रोल पहुंचाने की बात कही जाती है, लेकिन वास्तव में ऐसा नियमित रूप से नहीं होता. हाईवे पेट्रोल कुछ इमरजेंसी मामलों में मदद कर सकता है, लेकिन आपको फ्यूल का पैसा तो देना ही पड़ता है और ये सेवा हर जगह उपलब्ध नहीं होती. इसलिए इस पर पूरी तरह भरोसा ना करें. हमेशा लंबी ड्राइव से पहले फ्यूल चेक कर लें.
गड्ढों से एक्सीडेंट पर हर्जाना
यह आंशिक रूप से सही है. अगर सड़क की खराब रखरखाव साबित होता है तो NHAI या टोल ऑपरेटर के खिलाफ क्लेम किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों में कहा गया है कि खराब सड़क (पॉटहोल) पर टोल वसूलना गलत है और पीड़ित को मुआवजा मिलना चाहिए. बॉम्बे हाईकोर्ट ने पॉटहोल से मौत होने पर 6 लाख रुपये तक मुआवजे का आदेश दिया है. लेकिन क्लेम के लिए सिर्फ टोल रसीद काफी नहीं है. पुलिस रिपोर्ट (FIR), एक्सीडेंट की फोटो, मेडिकल रिपोर्ट, गवाह और सड़क की स्थिति के सबूत जरूरी होते हैं. प्रक्रिया लंबी हो सकती है और ऑटोमैटिक हर्जाना नहीं मिलता.
रसीद रखने के असली फायदे क्या हैं?
रसीद पर छपे हेल्पलाइन नंबर आसानी से मिल जाते हैं.
कुछ टोल प्लाजा पर 24 घंटे के अंदर रिटर्न जर्नी पर डिस्काउंट के लिए रसीद दिखानी पड़ सकती है.
गलत FASTag डिडक्शन होने पर रसीद से शिकायत आसान होती है.
रिकॉर्ड के तौर पर फोटो खींचकर रख लें तो बेहतर है.