रायपुर: डिजिटल सेवाओं को लेकर बड़ा मुद्दा संसद में उठाया गया है। बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा में ब्रॉडबैंड बिलिंग सिस्टम में सुधार की मांग करते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने की बात कही है।
लोकसभा में उठी उपभोक्ता हितों की आवाज
बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ब्रॉडबैंड बिलिंग सिस्टम को बिजली बिल की तरह पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिजली कटने पर उस अवधि का चार्ज नहीं लिया जाता, उसी तरह इंटरनेट सेवा बाधित होने पर भी उपभोक्ताओं से शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।
बिजली बिल जैसा मॉडल लागू करने की मांग
सांसद ने सुझाव दिया कि अगर इंटरनेट सेवा किसी कारण से बंद रहती है या नेटवर्क आउटेज होता है, तो:
- उस अवधि का चार्ज स्वतः कम किया जाए
- या उपभोक्ताओं को रिफंड दिया जाए
उन्होंने इसे उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।
डिजिटल युग में इंटरनेट की बढ़ती अहमियत
सांसद के अनुसार, आज के समय में इंटरनेट सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है।
- शिक्षा
- व्यवसाय
- वर्क फ्रॉम होम
- दैनिक कामकाज
सभी इंटरनेट पर निर्भर हैं, ऐसे में खराब सेवा के बावजूद पूरा बिल वसूलना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
सर्विस प्रोवाइडर्स पर उठे सवाल
उन्होंने कहा कि ज्यादातर इंटरनेट सेवा प्रदाता मासिक एकमुश्त शुल्क लेते हैं, भले ही सेवा बाधित रही हो। इससे उपभोक्ताओं को नुकसान होता है और सिस्टम में पारदर्शिता की कमी दिखती है।
क्या हो सकता है फायदा?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो:
- उपभोक्ताओं को सही बिलिंग का लाभ मिलेगा
- इंटरनेट कंपनियों पर सेवा सुधार का दबाव बढ़ेगा
- डिजिटल सेक्टर में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा