
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सख्त निर्देश जारी किया। आदेश में साफ कहा गया है कि पार्टी के कोई भी नेता अब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ किसी भी कार्यक्रम या मंच को साझा नहीं करेंगे।
क्या है पूरा आदेश?
यह निर्देश रायपुर ग्रामीण जिला कांग्रेस की ओर से जारी किया गया है।
जिलाध्यक्ष पप्पू बंजारे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि—

👉 कांग्रेस नेता किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, समारोह या मंच पर भाजपा नेताओं के साथ शामिल नहीं होंगे।
👉 आदेश का पालन करना सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए अनिवार्य होगा।


क्यों लिया गया यह फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय पार्टी अनुशासन बनाए रखने और कार्यकर्ताओं के बीच स्पष्ट संदेश देने के उद्देश्य से लिया गया है।
साथ ही, विपक्ष की भूमिका को और मजबूत करने की रणनीति भी मानी जा रही है।
बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
संतोष पांडेय ने बयान देते हुए कहा—
“यह कांग्रेस के भीतर की घबराहट और भगदड़ को दर्शाता है। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को दबाव में रखना चाहती है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व अपने नेताओं को स्वतंत्र रूप से काम करने नहीं दे रहा।
सियासी मायने क्या हैं?
- कांग्रेस का यह फैसला राजनीतिक दूरी बनाए रखने का संकेत है
- पार्टी के अंदर अनुशासन और एकजुटता पर जोर
- आगामी चुनावों को देखते हुए रणनीतिक कदम
राजनीति में बढ़ी हलचल
इस आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका आगामी राजनीतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों पर क्या असर पड़ता है।
