Kawardha News: पुलिस विभाग ने उठाया बड़ा अनुशासनात्मक कदम
कबीरधाम जिले में पुलिस विभाग ने अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए कड़ा फैसला लिया है। पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देश पर विभागीय जांच पूरी होने के बाद ड्यूटी के दौरान नशा करने और अनुशासनहीनता में लिप्त तीन आरक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
इस कार्रवाई को विभाग की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में एक सख्त उदाहरण माना जा रहा है।
आरक्षक अनिल मिरज: लगातार गैरहाजिरी और लापरवाही
जांच में सामने आया कि
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आरक्षक अनिल मिरज ने 334 दिन बिना सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का रिकॉर्ड बनाया।
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मोटर वारंट गुम करना, नोटिस तामील में लापरवाही,
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और 22 बार दंडित होने के बावजूद कोई सुधार नहीं।
विभाग ने माना कि उनका आचरण पुलिस अनुशासन के खिलाफ था और सेवा में बनाए रखना विभाग के हित में नहीं है।
आरक्षक आदित्य तिवारी: कोर्ट पेशी के दौरान नशे में सोते मिले
दूसरा मामला आरक्षक आदित्य तिवारी का था, जिसमें गंभीर अनुशासनहीनता सामने आई।
वे—
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बंदी पेशी जैसे संवेदनशील कार्य के दौरान शराब पीकर ड्यूटी कर रहे थे।
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न्यायालय परिसर के बाहर नशे में सोते पाए गए।
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91 दिन की बिना सूचना उपस्थिति नहीं।
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पहले भी ड्यूटी में नशा और अनुपस्थिति पर कई बार दंडित।
बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं होने पर विभाग ने उन्हें बर्खास्त कर दिया।
आरक्षक राजेश उपाध्याय: SP ऑफिस में ही नशे में हंगामा
आरक्षक चालक राजेश उपाध्याय का मामला भी बेहद गंभीर पाया गया।
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SP कार्यालय पहुंचने पर वे नशे की हालत में थे।
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गणवेश अस्त-व्यस्त,
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कर्मचारियों से बहस,
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और अनुचित व्यवहार किया।
पुलिस रेगुलेशन के खिलाफ यह आचरण बर्दाश्त योग्य नहीं था। पहले भी कई बार दंडित होने के बाद भी सुधार नहीं दिखा।
कबीरधाम पुलिस का संदेश: “नशाखोरी और अनुशासनहीनता की जगह नहीं”
पुलिस ने साफ कहा कि—
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ड्यूटी में नशा,
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गैरजिम्मेदारी,
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और अनुशासनहीन व्यवहार
किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
SP धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए सख्त चेतावनी है और विभाग की गरिमा एवं जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम है।
ड्यूटी और फील्ड पर बढ़ी सख्ती
जांच में यह भी सामने आया कि अनुशासनहीनता केवल कार्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि फील्ड ड्यूटी में भी गंभीर लापरवाही पाई गई।
कबीरधाम पुलिस की यह कार्रवाई विभाग में जवाबदेही, ईमानदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है।