दुनिया की सबसे ऊंची इमारत से आया डराने वाला वीडियो
बुर्ज खलीफा के बारे में आपने कई किस्से सुने होंगे, लेकिन जो वीडियो हाल ही में एक सफाई कर्मचारी ने रिकॉर्ड किया है, वह आपकी रूह तक कंपा देगा। 160वीं मंजिल के ऊपर से शूट किए गए इस वीडियो को देखकर सोशल मीडिया पर लोग दंग रह गए हैं। वीडियो तेजी से वायरल होकर अब तक 50 मिलियन से ज्यादा व्यूज़ हासिल कर चुका है।
आसमान में लटककर करनी पड़ती है सफाई
दुबई की 829.8 मीटर ऊंची बुर्ज खलीफा को चमकदार बनाए रखने के लिए हर दिन कई मजदूर अपनी जान जोखिम में डालते हैं।
• वीडियो में मजदूर दो रस्सियों के सहारे 600 मीटर से अधिक ऊंचाई पर कांच साफ करता दिखता है।
• नीचे झांकने पर केवल सफेद बादल नजर आते हैं—जमीन बिल्कुल भी दिखाई नहीं देती।
• हवा की तेज रफ्तार शरीर को झूले की तरह हिलाती रहती है, जिससे काम और भी खतरनाक हो जाता है।
लोग इस वीडियो को देखकर कह रहे हैं—
“10वीं मंजिल से डर लगता है, ये 160वीं मंजिल पर काम कर रहा है!”
इतनी खतरनाक ऊंचाई पर कैसे होती है सफाई?
बुर्ज खलीफा में कुल 163 मंजिलें और 24,000 से ज्यादा ग्लास पैनल हैं, जिनकी सफाई कई बार की जाती है।
सफाई प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण होती है:
-
मजदूर “बोसन चेयर” (हार्नेस चेयर) और दो सेफ्टी रोप से बंधे रहते हैं।
-
एक रस्सी फेल हो जाए तो दूसरी जान बचाती है।
-
600 मीटर की ऊंचाई पर हवा 50–60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती है।
-
अक्सर इस ऊंचाई पर बादल इमारत के आस-पास होते हैं, इसलिए नीचे सिर्फ कोहरा और बादल दिखाई देते हैं।
यह काम करने वाले अधिकांश मजदूर भारत, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आते हैं और इस जोखिम भरे काम के बदले हर महीने
3000–6000 दिरहम (₹70,000 से ₹1.4 लाख) तक कमाते हैं।
बादलों के ऊपर झूलने जैसा अहसास – वायरल हुआ वीडियो
वीडियो में कई वर्कर कांच साफ करते दिखते हैं जबकि नीचे सिर्फ धुंध, बादल और सफेद धुएं जैसा दृश्य नजर आता है।
लोगों को यह नजारा फिल्म की तरह ‘अवास्तविक’ लगा।
फिर भी, हैरानी की बात यह है कि
अब तक बुर्ज खलीफा की सफाई के दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है।
हालांकि निर्माण के दौरान एक मौत दर्ज की गई थी।
लोग कर रहे हैं सलाम
वीडियो पर लोगों ने कहा—
• “सैलरी चाहे जितनी भी हो जाए, मैं ये काम नहीं कर सकता!”
• “इन वर्कर्स की हिम्मत को सलाम।”
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि दुनिया चमकदार इमारतें जरूर देखती है, लेकिन इन्हें चमकाने वालों की मेहनत और खतरे को कम ही लोग समझते हैं।