दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। राज्य के दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग मंगलवार, 11 नवंबर को होगी। इससे पहले रविवार शाम को प्रचार थम गया, और अब नेता घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं।
राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 6 नवंबर को 212 सीटों पर मतदान हो चुका है। दूसरे चरण में 122 सीटों पर वोटिंग होगी और 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
🔸 पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान
पहले चरण के मतदान में 65% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। प्रचार के अंतिम दिन देश के बड़े नेताओं ने बिहार की धरती से वोटरों को लुभाने का आखिरी प्रयास किया।
🔸 राहुल गांधी की 15 रैलियां, सीमांचल पर फोकस
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार 15 जनसभाएं कीं, खासकर सीमांचल क्षेत्र (किशनगंज और पूर्णिया) में, जो मुस्लिम बहुल इलाका है। यह इलाका विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए बेहद अहम माना जाता है।
गांधी ने पहले ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के जरिए भी जनता से जुड़ने की कोशिश की थी, लेकिन ‘वोट चोरी’ का मुद्दा खास असर नहीं डाल सका।
🔸 अमित शाह का सबसे बड़ा प्रचार अभियान – 37 रैलियां
गृह मंत्री अमित शाह ने इस बार बिहार में सबसे व्यापक प्रचार अभियान चलाया। वे कई दिनों तक बिहार में डेरा डाले रहे और कुल 37 सभाएं कीं।
रविवार को शाह ने सासाराम और अरवल में जनसभाएं कीं — ये क्षेत्र भाजपा के लिए कमजोर माने जाते हैं, इसलिए पार्टी ने इन पर विशेष ध्यान दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी औरंगाबाद और कैमूर जिलों में रैलियां कीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक 14 सभाएं और एक रोड शो किया।
🔸 प्रियंका गांधी का बिहार डेब्यू
इस बार प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पहली बार बिहार में प्रचार किया। उन्होंने 10 रैलियां और एक रोड शो किया, हालांकि खराब मौसम के कारण एक सभा रद्द करनी पड़ी।
भाजपा के स्टार प्रचारकों में जेपी नड्डा, नितिन गडकरी, योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान, हिमंत बिस्व सरमा, मोहन यादव, रवि किशन और मनोज तिवारी शामिल रहे।
🔸 नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव का सीधा मुकाबला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी लगातार रैलियां कीं, हालांकि उनका प्रचार शांत लेकिन दृढ़ रहा। वे पांचवीं बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं तेजस्वी यादव विपक्षी ‘इंडिया गठबंधन’ की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जोश के साथ मैदान में हैं।
नीतीश और पीएम मोदी की साझा रैली के बाद मंच से दूरी ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए, लेकिन नीतीश ने स्वास्थ्य संबंधी अटकलों को दरकिनार कर प्रचार जारी रखा।
🔸 प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बनी ‘एक्स फैक्टर’
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी इस चुनाव में एक नया समीकरण बना रही है। उन्होंने पारंपरिक ‘रोड टू रोड’ और ‘घर-घर संपर्क’ अभियान पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने किशोर ने अपने गृह राज्य में पसीना बहाते हुए एक अलग ही शैली में प्रचार किया, जो अब इस चुनाव का ‘एक्स फैक्टर’ माना जा रहा है।