सिरोही | राजस्थान राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड में स्थित रजवाड़ा ब्रिज आज भी इंजीनियरिंग और मजबूती की अनोखी मिसाल बना हुआ है। साल 1889 में बनकर तैयार हुआ यह ऐतिहासिक पुल 136 साल बाद भी पूरी मजबूती के साथ खड़ा है, जबकि आज के दौर में बने कई पुल कुछ ही वर्षों में जर्जर हो जाते हैं।
19वीं सदी की इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण
रजवाड़ा ब्रिज का निर्माण 1887 में शुरू होकर 1889 में पूरा हुआ था। यह पुल आबूरोड से माउंट आबू जाने वाले मार्ग पर बनास नदी को पार करने के लिए बनाया गया था।
कोलकाता के हावड़ा ब्रिज की तरह ही यह भी एक स्टोन आर्च ब्रिज है, जिसे चूना और विशाल पत्थरों से तैयार किया गया था।
सिर्फ 1 लाख रुपये में हुआ था निर्माण
स्थानीय निवासी रमेश वैष्णव बताते हैं कि इस पुल के निर्माण पर उस समय महज 1 लाख रुपये खर्च हुए थे। यह लागत सिरोही राज्य और तत्कालीन भारत सरकार के संयुक्त आर्थिक सहयोग से वहन की गई थी।
इसी वजह से इस पुल को “रजवाड़ा ब्रिज” के नाम से जाना जाता है।
300 मीटर लंबा, पीढ़ियों की यादों से जुड़ा
करीब 300 मीटर लंबा यह ब्रिज तीन पीढ़ियों से लोगों का जीवन देख चुका है। पुल बनने से पहले यहां से सिर्फ बैलगाड़ियां ही गुजरती थीं। समय के साथ यह आबूरोड और माउंट आबू के बीच आवागमन का मुख्य जरिया बन गया।
बढ़ते ट्रैफिक के कारण 2007 में बना नया पुल
वाहनों की संख्या बढ़ने और ब्रिज की चौड़ाई कम होने के कारण 2007 में पास ही एक नया पुल बनाया गया। इसके बाद से रजवाड़ा ब्रिज को
✔ पैदल यात्रियों
✔ छोटे वाहनों
✔ मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक
के लिए सुरक्षित कर दिया गया।
पर्यटकों को भाता है हैरिटेज लुक
रजवाड़ा ब्रिज का हैरिटेज लुक आज भी स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
🌧️ बारिश के मौसम में यहां से बनास नदी का मनमोहक दृश्य देखने लायक होता है, जिस वजह से यह जगह फोटो प्रेमियों की भी पसंद बन गई है।
मरम्मत के लिए बजट मंजूर
सरकार द्वारा इस ऐतिहासिक धरोहर की समय-समय पर देखरेख की जाती रही है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने इसके मरम्मत कार्य के लिए बजट स्वीकृत कर दिया है, जिससे जल्द ही इसका संरक्षण और मजबूती और बढ़ाई जाएगी।