फर्जी एनकाउंटर का आरोप : हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, सुप्रीम कोर्ट ने शव सुरक्षित रखने दिए थे आदेश

बेटे का गंभीर आरोप

बिलासपुर। नारायणपुर जिले में 23 सितंबर को हुए कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए रामचंद्र रेड्डी के बेटे ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनके पिता की मौत एनकाउंटर में नहीं बल्कि पुलिस कस्टडी में हुई थी

स्वतंत्र जांच की मांग

याचिका में यह मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच राज्य से बाहर के किसी स्वतंत्र अधिकारी से कराई जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि उनके पिता को नक्सली गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर फर्जी एनकाउंटर में मौत के घाट उतार दिया गया।

हाईकोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन से जवाब मांगा है और साथ ही मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में होगी।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

मृतक के बेटे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस को निर्देश दिया था कि शव को सुरक्षित रखा जाए और न तो दफनाया जाए और न ही उसका अंतिम संस्कार किया जाए, जब तक हाईकोर्ट याचिका पर अपना फैसला नहीं सुनाता।

माओवादी कमांडर पर बड़ा इनाम

सरकार ने रामचंद्र रेड्डी को शीर्ष माओवादी कमांडर बताया था, जिस पर सात राज्यों में लगभग 2 करोड़ का इनाम घोषित था। 22 सितंबर को पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियान में रेड्डी और एक अन्य नक्सली कादरी सत्यनारायण रेड्डी को ढेर कर दिया था। लेकिन बेटे ने इस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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