Ajab Gajab: तंग गलियों में छिपा भूत महल, रहस्य, डर और इतिहास का है संगम, कहानी ऐसी कि रोंगटे खड़े हो जाएं

Bhoot Mahal Mystery: उदयपुर की तंग गलियों में स्थित रहस्यमयी ‘भूत महल’ आज भी लोगों के बीच कौतूहल और डर का विषय बना हुआ है. लोककथाओं के अनुसार, एक तांत्रिक यतिन ने एक ही रात में यह नौ मंजिला इमारत बनवा दी थी. कहा जाता है कि भूतों की मदद से तैयार इस महल को देखकर महाराणा भी स्तब्ध रह गए थे. इसकी बनावट, असमान ऊंचाई वाले कमरे और पिरामिडनुमा संरचना रहस्य को और गहरा करती है. इतिहास और लोकविश्वास के बीच झूलता यह महल आज भी कई अनसुलझे सवाल छोड़ जाता है.

उदयपुर. झीलों की नगरी उदयपुर अपनी खूबसूरती, महलों और शाही इतिहास के लिए जानी जाती है, लेकिन इस शहर की तंग गलियों में कुछ ऐसी कहानियां भी दबी हैं, जो आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं. लोकल 18 की ‘अजब-गजब’ सीरीज में इस बार टीम पहुंची शहर के उस रहस्यमयी इलाके में, जिसे लोग आज भी ‘भूत महल’ के नाम से जानते हैं. ग्राउंड जीरो पर पाया कि भीड़भाड़ वाली गलियों के बीच एक खास क्षेत्र को आज भी ‘भूत महल’ कहा जाता है. स्थानीय लोगों में इस हवेली को लेकर तरह-तरह की दंतकथाएं प्रचलित हैं.

भूत महल के वर्तमान मालिक सुरेंद्र मेहता से बातचीत में कई रोचक तथ्य सामने आए. उन्होंने बताया कि यह इमारत अरावली की एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है. लोककथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में यहां एक यतिन (तांत्रिक) निवास करता था, जो जादू-टोने में पारंगत था. एक दिन उसका तत्कालीन शासक महाराणा से वाद-विवाद हो गया. कहा जाता है कि महाराणा ने यतिन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह अपनी शक्ति सिद्ध करना चाहता है तो रातों-रात कोई चमत्कार करके दिखाए. इस पर यतिन ने दावा किया कि अगली सुबह तक महाराणा के महल के ठीक सामने 9 मंजिला इमारत खड़ी मिलेगी.

महल को देखकर स्तब्ध रह गए थे महाराणा

महाराणा ने इसे असंभव समझा, लेकिन सुबह जब उन्होंने अपने महल से बाहर देखा तो सामने एक ऊंचा, विशाल और अनोखी बनावट वाला महल खड़ा था. यह दृश्य देखकर दरबारियों समेत स्वयं महाराणा भी स्तब्ध रह गए. जब यतिन से पूछा गया कि यह निर्माण कैसे हुआ, तो उसने कथित तौर पर कहा कि इसे एक ही रात में भूतों ने तैयार किया है. दंतकथाओं के अनुसार, यह इमारत महाराणा के महल से भी ऊंची थी. शाही गरिमा के चलते इसकी चार मंजिलें हटवा दी गई. स्थानीय मान्यता है कि वे चार मंजिलें भीलवाड़ा जिले के मांडल कस्बे में स्थापित कर दी गईं. हालांकि, इसके ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं मिलते.

एक-दूसरे से भिन्न है महल के कमरों की ऊंचाई

इस महल की संरचना भी रहस्य को और गहरा करती है. करीब 10,000 स्क्वायर फीट से अधिक क्षेत्र में फैली इस इमारत के भीतर प्रवेश करते ही एक अलग अनुभूति होती है. अंदर का ढांचा पिरामिडनुमा प्रतीत होता है. कमरों की ऊंचाई एक-दूसरे से भिन्न है. कोई कमरा बेहद ऊंचा तो कोई असामान्य रूप से नीचा. मेवाड़ की पारंपरिक वास्तुकला में जहां संतुलन और समानता देखने को मिलती है, वहीं यह महल उन सभी मानकों से बिल्कुल अलग नजर आता है. इतिहासकारों के अनुसार, तत्कालीन प्रधान मेहता अगर चंद (1764-1799) के पास उदयपुर में उपयुक्त निवास नहीं था, जिसके चलते यह हवेली उन्हें प्रदान की गई.

नई संरचना को देखकर महाराणा अरि सिंह द्वितीय हो गए थे असहज 

वहीं शाही अभिलेखों में उल्लेख मिलता है कि नई संरचना को देखकर महाराणा अरि सिंह द्वितीय असहज हो गए थे, क्योंकि यह हवेली महाराणा और कंवरपाड़ा महलों के बाद आकार में सबसे बड़ी थी और इसकी उत्पत्ति स्पष्ट नहीं थी. शायद इसी अनिश्चितता और रहस्य ने इसे ‘भूत महल’ का नाम दे दिया.

आज भी जब शाम ढलती है और संकरी गलियों में सन्नाटा पसरता है, तो स्थानीय लोग इस महल के पास से गुजरते हुए धीमे कदमों से चलते हैं. सच क्या है इतिहास, वास्तुकला का प्रयोग या फिर लोकविश्वास. भूत महल आज भी सवाल छोड़ जाता है कि क्या सचमुच एक रात में खड़ा हुआ था यह रहस्यमयी ढांचा, या यह मेवाड़ के इतिहास की सबसे दिलचस्प लोककथा है.

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