बस्तर/तेलंगाना। देश में नक्सलवाद से जुड़े घटनाक्रम के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। माओवादी संगठन के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य गणपति उर्फ मुपल्ला लक्ष्मण राव के आत्मसमर्पण की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने तेलंगाना में सरेंडर किया है। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
यदि यह खबर सही साबित होती है, तो इसे माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
माओवादी संगठन के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक
गणपति को माओवादी संगठन के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। वे पिछले करीब चार दशकों से भूमिगत जीवन जी रहे थे और संगठन की रणनीति व वैचारिक दिशा तय करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार गणपति लंबे समय से देश की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल रहे हैं।
2018 में छोड़ा था महासचिव का पद
गौरतलब है कि 2018 में बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए गणपति ने माओवादी संगठन के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।
इसके बावजूद वे संगठन के शीर्ष नेतृत्व में सक्रिय रहे और कई महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका मानी जाती रही है।
3.5 करोड़ रुपये का था इनाम
गणपति पर केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से कुल 3.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
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छत्तीसगढ़ सरकार – 1 करोड़ रुपये
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अन्य राज्यों और एजेंसियों द्वारा भी अलग-अलग इनाम घोषित
इस वजह से वे सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से एक बड़ा लक्ष्य रहे हैं।
नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़ी सफलता हो सकती है
अगर गणपति के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़ी कामयाबी मानी जाएगी। खासकर बस्तर और तेलंगाना क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।