बिलासपुर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने से जुड़े एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि लड़की बालिग है और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए गए हैं, तो ऐसे मामले को सीधे तौर पर बलात्कार (रेप) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
20 साल बाद आरोपी को मिली राहत
इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एन.के. व्यास की एकल पीठ ने निचली अदालत के फैसले को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही आरोपी युवक को बरी कर दिया गया। इस फैसले के बाद आरोपी को करीब 20 साल बाद बड़ी राहत मिली है।
सरगुजा जिले से जुड़ा है मामला
यह मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2000 में युवती 12वीं कक्षा की छात्रा थी और पढ़ाई के दौरान किराए के मकान में रहती थी। उसी दौरान लीना राम ध्रुव नामक युवक भी पढ़ाई कर रहा था और दोनों के बीच दोस्ती हो गई।
समय के साथ यह दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई।
युवती ने लगाए थे शादी का झांसा देने के आरोप
युवती का आरोप था कि 8 सितंबर 2000 को युवक ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद करीब तीन साल तक दोनों के बीच संबंध बने रहे।
पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने-अपने गांव लौट गए, लेकिन युवती के अनुसार वे समय-समय पर मिलते रहे।
हाईकोर्ट ने कहा – सहमति से बने संबंध को रेप नहीं कहा जा सकता
हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद कहा कि जब दोनों के बीच लंबे समय तक सहमति से संबंध बने हों, तो इसे जबरन बनाए गए संबंध या रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
इसी आधार पर अदालत ने लोअर कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।